आधार केंद्रों के सरकारी घोषित होने से दोबारा खुलने की उम्मीद

उत्तराखण्ड

देहरादून। सरकारी भवनों में शिफ्ट न करने के कारण बंद किए गए 200 से ज्यादा आधार केंद्रों के सरकारी घोषित होने से दोबारा खुलने की उम्मीद जगी है। इस संबंध में आधार केंद्र एसोसिएशन ने सचिव आइटी से मुलाकात की थी। जिसके बाद उन्हें इन केंद्रों को सरकारी घोषित करते हुए खोलने का आश्वासन दिया गया। साथ ही सचिव ने फाइल को मुख्य सचिव के पास भेज दिया है। यदि मुख्य सचिव अनुमति देते हैं तो आधार केंद्रों के खुल जाने से लोगों को राहत मिलेगी।

दरअसल, इन केंद्र संचालकों से कहा गया था कि वे अपने केंद्र सरकारी भवनों में शिफ्ट कर दें, जिससे कि इनका संचालन सरकारी अधिकारियों की देखरेख में हो सके। उद्देश्य यह था कि इससे आधार कार्ड बनाने के नाम पर हो रही अवैध वसूली पर रोक लगेगी। अब स्थिति ये हो गई कि केंद्र बंद होने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इस मामले में दो दिन पहले दून सीएचसी वेलफेयर एसोसिएशन ने सचिवालय में सचिव आइटी रविनाथ रमन से मुलाकात की। इस दौरान एसोसिएशन ने कहा कि केंद्र बंद होने से लोगों को तो दिक्कतें हो ही रही हैं, साथ ही आधार केंद्र संचालक भी परेशान हैं। कहा कि पूर्व में सरकार ने शहर में चल रहे आधार केंद्रों को मॉडल केंद्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए थे, इस प्रक्रिया को पूरा करने में संचालकों का लाखों रुपया खर्च हो गया।

अब सरकार केंद्रों को सरकारी दफ्तरों में शिफ्ट करना चाहती है, जिससे संचालकों का अतिरिक्त खर्च आने के साथ स्टाफ की समस्या खड़ी होगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण अरोड़ा ने बताया कि संगठन ने मॉडल केंद्रों को सरकारी केंद्र घोषित करने की मांग की है। इससे आधार केंद्र भी खुल जाएंगे और अवैध वसूली जैसी शिकायतें भी नहीं आएंगी।

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